Pitra Dosh Puja Ujjain में करने का क्या महत्व है ?
पितृ दोष पूजन करने के लिए पुराणों में जो चार वृक्षों का वर्णन किया है उसमें से एक वृक्ष उज्जैन स्थित भैरवगढ़ के पूर्व में शिप्रा नदी के किनारे पर है । उसे सिद्धवट वृक्ष बोला जाता ह। जो भी व्यक्ति यहां पितृ दोष की पूजन करता है वह व्यक्ति पितृ दोष से मुक्त हो जाता है इसी कारणवश बहुत सारे श्रद्धालु अवंतिका नगरी उज्जैन स्थित सिद्धवट मंदिर आते हैं। स्कंद पुराण में सिद्धवट को प्रेत शिला तीर्थ भी कहा है।
क्या है पितृ दोष ?
पित्र याने पूर्वज जो भी हमारे पूर्वज हे गुजर गए हैं|वह गुजरने के बाद उनका संस्कार सही तरीके से नहीं हुआ हो | या फिर उनकी कुछ इच्छाएं अधूरी रह गई हो तो उस कारण व्यक्ति व्यक्ति को कुंडली के माध्यम से पितृ दोष लगता है अगर व्यक्ति की कुंडली में दूसरे भाव में, पांचवे भाव में, नवे भाव में, दशम भाव में, सूर्य और राहु की युति बनती है| तो उसे पितृदोष बोला जाता है | अगर पिछले जन्म में कुछ बुरे कर्म हो गए हो तो भी पितृदोष लगता है| इस दोष से मुक्त होने के लिए पितृदोष निवारण पूजन करना आवश्यक है। पित्र दोष पूजा करने से हमारे पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, और हमारे बिगड़े हुए काम बनने लगते हैं |
Pitra Dosh Puja Ujjain विधि हिंदी में :
पितृदोष पूजा विधि में आटे का पिंड बनाकर विधि विधान से पूजन किया जाता है| उसके बाद मंडल पूजन किया जाता है| पितरों के लिए हवन भी किया जाता है |यह करने से पितरों से आशीर्वाद प्राप्त होते हैं| इस तरह पूजन अर्चन और तर्पण होता है.
जो भी लोग शांत हुए हैं उनका नाम लेकर अंगूठे के माध्यम से जल प्रदान किया जाता है. इसका यह मतलब है कि हमारे हाथों में चार प्रकार के तीर्थ है
देव तीर्थ : उंगलियोंके माध्यम से सामग्री चढ़ाई जाती है।
ऋषि तीर्थ: दोनों हातो से सामग्री प्रदान की जाती है।
पितृ तीर्थ: अंगूठे से सामग्री प्रदान की जाती है।
ब्रह्म तीर्थ: हम स्वयं पीते है।
इस तरह पुरे विधि विधान से प्रक्रिया पूरी की जाती है।
उसके बाद जो भी हमारे पितृ है उनको धुप देने का विधि किया जाता है। इस धुप के माध्यम से पितरोंको को मोक्ष मिलने की अनुमति मिल जाती है। और हम पितरोंका आशीर्वाद प्राप्त करते है। और जो भी हमारे बिगड़े हुए काम है उसमे राहत मिलना शुरू हो जाता है। इस वजह से पुरे विश्व में पितृ दोष पूजन को विशेष महत्व प्राप्त है। आपको पूजन करते समय संपूर्ण ध्यान विधि पे केंद्रित करना आवश्यक है। यह पूजन आपके जीवन में खुशियाली लेकर आये यही बाबा सिद्धनाथ के चरणों में प्रार्थना।
पितृदोष से क्या हानि होती है ?
जिस व्यक्ति की कुंडली में पितृदोष बना हुआ है उस व्यक्ति के काम होते होते रुक जाते हैं। जीवन में सदैव तनाव बना रहता है। शारीरिक स्वास्थ्य में समस्या हो सकती है। संतान प्राप्ति में बाधा आती है । परिवार के लोगों की अकाल मृत्यु होने की संभावना रहती ह। भूमि संबंधित परेशानी हो सकती है। कर्जा सकता है। इस तरह से व्यक्ति को जीवन में बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
Pitra Dosh Puja Ujjain में कब कर सकते है?
यहाँ पर भव्य-दिव्य मंदिर है भगवान सिद्धनाथ का | सिद्धवट वृक्ष का स्थान होने की वजह यहाँ पर १२ ही महीने पूजन होती है। आपके समय नुसार आ सकते है। सुबह ७ से लेकर दोहपर 12 के बिच में आप आने के बाद पूजन शुरू कर सकते है। यह पूजन सामान्यता 2 घंटे तक चलती है |
विशेष जानकारी:
सभी सामग्री की व्यवस्था पंडितजी करते है|आपको सिर्फ कपडे लेकर आना है। आदमी ,लड़का -धोती, कुर्ता, रुमाल औरत, लड़की -साड़ी (काला, सफेद, हरा कलर) छोड़कर लेकर आना है |यह कपडे पूजन के बाद छोड़ने होते है और दूसरे कपडे पहनने होते है। पूजन को आने से १ दिन पहले कॉल करना जरूरी है । अकेला व्यक्ति भी यह पूजन कर सकता है।
अधिक जानकारी के लिए आप 8180885588 मोबाइल नंबर पर संपर्क कर सकते है।